नंदुरा आल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन की सभा अब सवालों के घेरे में, घिरती जा रही है. बैनरों के खर्च और प्रोटोकॉल को लेकर उठे सवाल

नंदुरा, बुलढाणा | 20 जुलाई 2025:
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) की 20 जुलाई को नंदुरा में आयोजित सभा इन दिनों विवादों में घिरती जा रही है। यह सभा, जिसमें औरंगाबाद के माजी खासदार सय्यद इम्तियाज़ जलील साहब शामिल हुए थे, अब ये सभा कई सवालों के केंद्र में है – चाहे वह सय्यद इम्तियाज़ जलील साहब के आगमन मार्ग को लेकर हो या फिर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के महाराष्ट्र प्रदेश उपाध्यक्ष के फार्महाउस पर भोजन को लेकर।

सूत्रों के अनुसार, सभा के प्रचार हेतु लगाए गए बैनरों को लेकर भी अब अटकलें लगाई जा रही हैं। सवाल यह उठ रहे हैं कि इन बैनरों का खर्च किसने वहन किया – नंदुरा मजलिस या कोई अन्य व्यक्ति ने? यदि यह खर्च स्थानीय मजलिस की ओर से किया गया था, तो इन बैनरों पर पार्टी प्रोटोकॉल का पालन क्यों नहीं हुआ? और यदि यह खर्च किसी बाहरी व्यक्ति ने उठाया था, तो इसकी इजाजत किसने दी?

इस विवाद के बीच एक अहम सवाल यह भी है कि यदि नंदुरा मजलिस के कथित ज़िम्मेदारों के पास सभा के बैनरों और अन्य व्यवस्थाओं का खर्च उठाने की क्षमता नहीं थी, तो फिर ऐसी सभा आयोजित ही क्यों की गई? और अगर खर्च वहन नहीं किया जा सकता था, तो फिर संगठन के पदों को प्राप्त करने की होड़ में शामिल होने का क्या औचित्य था? क्या ऐसे लोगों को जिम्मेदारी सौंपना सही है, जो ना संगठन के सम्मान की रक्षा कर सके, ना ही समुदाय की गरिमा की?

मेरा यह भी स्पष्ट मत है कि यह विरोध आल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन संगठन या उसके उच्च पदाधिकारियों के खिलाफ नहीं है, बल्कि उन तथाकथित स्थानीय जिम्मेदारों के खिलाफ है जो खुद को संगठन का प्रतिनिधि और क़ौम का रहबर बताते हैं, परंतु अपने कृत्यों से दोनों की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाते हैं।

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे चिंताजनक बात यह है कि बुलढाणा ज़िले के वरिष्ठ जिम्मेदार और इस विषय पर मौन हैं। इससे यह आशंका और प्रबल हो जाती है कि क्या जिले भर के लोग इस प्रक्रिया में सम्मिलित थे? क्या सय्यद इम्तियाज़ जलील साहब को इन सभी बातों से अनभिज्ञ रखा गया? और यदि हां, तो यह उनकी प्रतिष्ठा के साथ अन्याय नहीं है?

ऐसे में यह अपेक्षा की जा रही है कि महाराष्ट्र मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन के महाराष्ट्र अध्यक्ष तथा वरिष्ठ नेता सय्यद इम्तियाज़ जलील साहब इस मामले को गंभीरता से लेंते है ये नही और ऐसे लोगों के खिलाफ क्या आवश्यक कार्रवाई करते है जिनकी वजह से पार्टी की गरिमा को ठेस पहुंची है।

संपादकीय टिप्पणी:
एक जिम्मेदार राजनीतिक संगठन का कर्तव्य है कि वह अपने आंतरिक ढांचे को पारदर्शी और जवाबदेह बनाए। यदि पार्टी की निचली इकाइयों में इस प्रकार की गतिविधियाँ होती हैं, तो उसे नजरअंदाज करना संगठन के मूल्यों को खोखला कर सकता है।
अब्दुल रफ़ीक़ शेख (आर टी आई एक्टिविस्ट नंदुरा)

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