भारतीय जनता पार्टी हो या नांदुरा नगर विकास अकोट आघाड़ी—दोनों ही राजनीतिक ताक़तों ने मुस्लिम समाज और मुस्लिम नेताओं का इस्तेमाल सिर्फ और सिर्फ सत्ता हासिल करने के लिए किया। चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे, भरोसे की मीठी बातें और “साथ चलने” के दावे किए गए, लेकिन जैसे ही सत्ता हाथ लगी, मुस्लिम समाज को पूरी तरह नज़रअंदाज़ कर दिया गया।
भारतीय जनता पार्टी को नगर अध्यक्ष पद के लिए मुस्लिम समाज ने लगभग 3800 वोट दिए। यह कोई छोटी संख्या नहीं है। इसके बावजूद सत्ता में आते ही भाजपा ने मुस्लिम नेतृत्व को ज़ोरदार राजनीतिक तमाचा मारा।
न तो किसी मुस्लिम को नगर उपाध्यक्ष पद के योग्य समझा गया और न ही किसी मुस्लिम नेता को विकल्प के रूप में भी स्वीकार किया गया।
वैसे भी भाजपा से मुस्लिम समाज को ज़्यादा उम्मीदें नहीं रहतीं—यह बात जगज़ाहिर है। लेकिन शर्म उन मुस्लिम नेताओं को आनी चाहिए, जो भाजपा के लिए गली-गली घूमकर मुस्लिम समाज से वोट मांगते रहे। उन्होंने समाज को भरोसा दिलाया, लेकिन बदले में समाज को क्या मिला? सिर्फ अपमान।
अब बात करते हैं नांदुरा नगर विकास अकोट आघाड़ी की।
नगर अध्यक्ष पद के उम्मीदवार को मुस्लिम समाज और मुस्लिम नेताओं के कहने पर लगभग 4000 वोट मिले। मुस्लिम समाज ने एक बार फिर भरोसा दिखाया। इतना ही नहीं, मुस्लिम समाज ने आठ नगरसेवक भी जिताकर दिए।
लेकिन बदले में अकोट आघाड़ी ने भी वही किया, जो भाजपा ने किया।
एक मुस्लिम नेता को “ऑप्शन” में रखने का झूठा भरोसा दिया गया, लेकिन पूरे पाँच साल के लिए मुस्लिम नेतृत्व को पूरी तरह किनारे कर दिया गया। न प्रतिनिधित्व, न सम्मान, न हिस्सेदारी।
इसलिए शर्म सिर्फ सत्ताधारी दलों को ही नहीं, बल्कि उन मुस्लिम नेताओं को भी आनी चाहिए जो खुद को समाज का रहनुमा कहते हैं, लेकिन सत्ता के आगे पूरी तरह खामोश हैं।
आज हालात ऐसे हैं कि न सत्ताधारी पार्टी मुस्लिम समाज की सुन रही है, न विपक्ष। तब सवाल उठता है—
जिस समाज के वोटों से सत्ता बनती है, उसी समाज की आवाज़ क्यों दबा दी जाती है?
हमारे मुस्लिम नेताओं ने हमारे वोट दिलवाकर हमें आखिर किसके हवाले कर दिया?
यह कोई भावनात्मक सवाल नहीं, बल्कि सोचने और आत्ममंथन करने का गंभीर विषय है।
अगर आज भी हम नहीं जागे, सवाल नहीं पूछे और जवाबदेही तय नहीं की—तो आने वाले चुनावों में भी हमारा इस्तेमाल इसी तरह होता रहेगा।
अब वक्त आ गया है कि मुस्लिम समाज सिर्फ वोट बैंक न बने,
बल्कि अपनी राजनीतिक हैसियत, दिशा और नेतृत्व खुद तय करे।
— युवा जिलाध्यक्ष
आज़ाद पठान
समाजवादी पार्टी
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