🚨 क्या मुसलमान होना गुनाह है, साहब?मुख्याधिकारी की कुर्सी पर बैठकर संविधान की धज्जियाँ उड़ाओगे?✍️ युवा जिल्हाध्यक्ष – समाजवादी पार्टी, नांदुरा


नगरपरिषद नांदुरा के मुख्याधिकारी साहब,
इतनी भी क्या गुलामी है सत्ता की?
जो सत्ताधारी नेता जहाँ कहें, वहाँ मुरूम फेंक देते हो – भले ही वो सिमेंट काँक्रीट रोड क्यों ना हो! और उधर मुस्लिम बस्ती गैबी नगर, खाजा नगर, इनायतिया स्कूल परिसर की हालत देखो – कीचड़, गटर, गड्ढे – इंसान चल नहीं सकता! लेकिन आपको कोई फर्क नहीं पड़ता।
शर्म करो साहब!
क्या हम मुसलमान इस शहर के नागरिक नहीं हैं?
क्या हम सिर्फ इसलिए सड़ते रहें क्योंकि आपके आकाओं को हमारी बस्ती से कोई मतलब नहीं?
आप उस संविधान के नाम पर शपथ लेकर बैठे हो जो हर नागरिक को समान हक़ देता है, और उसी संविधान को पैरों तले रौंदकर भेदभाव कर रहे हो!
आपकी कुर्सी, आपकी नीतियाँ, आपका फैसला – सब कटघरे में खड़े हैं!
ये मत भूलिए –
हम जुबान से जवाब नहीं देते, ज़रूरत पड़ी तो सड़क से लेकर अदालत तक हिला देंगे!
हम संविधान को मानते हैं, पर अन्याय बर्दाश्त नहीं करेंगे!
आज अगर आपने मुस्लिम बस्ती की अनदेखी बंद नहीं की,
तो ये जनता आपको नाम से नहीं, काम से याद रखेगी – और उस काम की शर्मनाक कहानी इतिहास में दर्ज होगी!
– आझाद पठाण
युवा जिल्हाध्यक्ष, समाजवादी पार्टी, नांदुरा

✊ "ना डरेंगे, ना झुकेंगे – अब हर अन्याय का जवाब खुलेआम मिलेगा!"

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