🛑 "नांदुरा का मुसलमान ना बिकाऊ है, ना डरपोक!" 🛑✍️ आज़ाद पठान, युवा जिल्हाध्यक्ष – समाजवादी पार्टी


नांदुरा शहर का मुसलमान अब किसी "आऊ भाऊ" को नगरपरिषद, विधानसभा या लोकसभा में जिताने या हराने के लिए मोहरा नहीं बनेगा।
हम अल्लाह के सिवा किसी से डरते नहीं, और किसी की गुलामी नहीं करते।
लेकिन कुछ मुनाफिक – जो चंद रुपये और झूठी इज्जत के लिए "आऊ भाऊ" की चमचागिरी में इतने अंधे हो गए हैं –
उन्हें अब अपने ही समाज पर हो रहे जुल्म और अत्याचार नजर नहीं आते।
❌ जब शहर में दंगे होते हैं...
❌ जब बेगुनाह मुस्लिम युवकों पर झूठे केस दर्ज होते हैं...
❌ जब प्रशासन मुस्लिम बस्तियों में दरवाजे तोड़कर घुसता है और औरतों के साथ बदसलूकी करती है...
...तब "आऊ भाऊ" अपने एसी कमरे में आराम से बैठकर तमाशा देखते हैं।
उनके ये मुनाफिक चमचे भी इतने दबे-कुचले हैं कि उनमें इतनी हिम्मत नहीं कि भाऊ को जाकर कह सकें –
"हमारे लोगों पर जो जुल्म हो रहा है, उसे बंद करवाओ!"
👉 गैबी नगर और खाजा नगर जैसी मुस्लिम बस्तियों में ना साफ पानी है, ना पक्के रास्ते।
लेकिन इन तथाकथित नेताओं को सिर्फ हमारे वोट चाहिए – हमारी तकलीफों से कोई लेना-देना नहीं।
🛑 इसलिए मैंने – आज़ाद पठान ने – मजबूरी में राजनीति का रास्ता चुना।
मैंने समाजवादी पार्टी जैसे उस दल को नांदुरा में खड़ा किया जिसका सच्चा कार्यकर्ता भी नांदुरा शहर मैं नहीं था।
पिछले दो साल से मैं हर मोर्चे पर – निवेदन से लेकर आंदोलन तक – मुस्लिम समाज के लिए खड़ा रहा।
📢 और अब मैंने नांदुरा नगरपरिषद चुनाव में नगराध्यक्ष पद के लिए समाजवादी पार्टी से दावेदारी की है।
मैं साफ कहता हूं – मुझे अल्लाह के सिवा कोई खरीद नहीं सकता!
मैं यहां वोटों के सौदागरों से लड़ने आया हूं,
मैं नांदुरा के मुसलमानों की आवाज़ बनकर आया हूं!
🗳️ अब फैसला नांदुरा के हर मुसलमान के हाथ में है –
क्या वो फिर से मुनाफिकों की चाल में फंसेंगे?
या इस बार आवाज़ उठाएंगे, सवाल पूछेंगे, और जवाब मांगेंगे?

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