मलकापुर नगर परिषद चुनाव 2025 में कांग्रेस की जीत के बाद जब नगरसेवक पद के लिए नामों पर चर्चा शुरू हुई, तो जनता और जमीनी कार्यकर्ताओं की पहली पसंद फिरोज़ खान बनकर उभरे।
लेकिन सवाल यह है कि तीन दशकों से कांग्रेस की सेवा करने वाले, ईमानदार, संघर्षशील और लोकप्रिय नेता फिरोज़ खान को जानबूझकर किनारे क्यों किया जा रहा है?
तीन दशक की निष्ठा, फिर भी अपमान!
फिरोज़ खान कोई अवसरवादी नेता नहीं हैं।
टिकट मिले या न मिले, सत्ता में रहे या विपक्ष में —
उन्होंने हर परिस्थिति में कांग्रेस का झंडा मजबूती से थामे रखा।
जनसमस्याएँ हों, आंदोलन हों या चुनावी संघर्ष —
हर मोर्चे पर फिरोज़ खान सबसे आगे खड़े नज़र आए।
गरीब परिवार से आना बना ‘गुनाह’?
आज जो सच्चाई सामने आ रही है, वह बेहद शर्मनाक है।
राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी के कुछ नेता सिर्फ इसलिए फिरोज़ खान को नजरअंदाज कर रहे हैं क्योंकि वे गरीब परिवार से आते हैं।
इतना ही नहीं, बार-बार उनका अपमान किया जा रहा है, उनकी काबिलियत को जानबूझकर छोटा दिखाया जा रहा है।
क्या कांग्रेस अब सिर्फ धनवानों और रसूखदारों की पार्टी बनकर रह गई है?
क्या गरीब, मेहनती और ईमानदार कार्यकर्ता का पार्टी में कोई स्थान नहीं?
जनता बनाम चंद नेता
मलकापुर की जनता जानती है कि
फिरोज़ खान सिर्फ नेता नहीं, भरोसे का नाम हैं।
शहर हो या ग्रामीण इलाका —
हर जगह उनकी स्वीकार्यता है, सम्मान है।
लेकिन अफसोस कि कुछ तथाकथित नेता
जनता की आवाज़ नहीं,
अपनी निजी पसंद और वर्गीय सोच को प्राथमिकता दे रहे हैं।
कांग्रेस नेतृत्व से सीधा सवाल
अगर कांग्रेस सच में
गरीबों, वंचितों और मेहनतकशों की पार्टी है,
तो फिरोज़ खान जैसे नेता को बार-बार अपमानित क्यों किया जा रहा है?
आज अगर ऐसे नेताओं को दबाया गया,
तो कल कांग्रेस का जमीनी आधार खुद कमजोर हो जाएगा।
अब चुप्पी नहीं, जवाब चाहिए!
मलकापुर की जनता और कांग्रेस कार्यकर्ता अब सवाल पूछ रहे हैं —
गरीब का बेटा होने का अपराध कब तक सज़ा बनेगा?
ईमानदारी और संघर्ष की जगह दौलत और रसूख कब से योग्यता बन गई?
फिरोज़ खान की अनदेखी
सिर्फ एक व्यक्ति का अपमान नहीं,
बल्कि कांग्रेस की विचारधारा पर सीधा सवाल है।
अब फैसला कांग्रेस को करना है —
विचारधारा चुनेगी या वर्गवाद?
संघर्ष चुनेगी या अहंकार?
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